सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाना अब अनिवार्य नहीं – सुप्रीम कोर्ट

सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाना अब अनिवार्य नहीं – सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस सुझाव को स्वीकार कर लिया है कि सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए। सरकार द्वारा कहे जाने पर की अंतिम निर्णय एक बार मंत्री पैनल दिशानिर्देश बना ले उसके बाद लिया जायेगा।उसके के एक दिन बाद अदालत ने अपने 2016 आदेश में संशोधित किया। राष्ट्रगान के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि अगर सिनेमा हॉल राष्ट्रगान बजता हैं तो दर्शकों को खड़ा होना होगा। यानी अब मूवी के पहले राष्ट्रगान बजाना है या नहीं, यह थियेटर ऑनर पर डिपेंड करेगा। कोई व्यक्ति यदि राष्ट्रगान के दौरान खड़ा नहीं होता या फिर इसे गाने से मना कर देता है तो ये दंडनीय अपराध नहीं है। वहीं यदि राष्ट्रगान गाते वक्त कोई व्यक्ति व्यवधान पैदा करता है, तो उसे 3 साल की सजा और जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।

याचिकाकर्ता के वकील अभिनव श्रीवास्तव ने कहा,’हम खुश हैं। हमारी मांगों का हिस्सा पूरा हो गया है। हम अपने सुझाव पैनल को देंगे।” कोर्ट के पिछले साल अक्तूबर में लिए गए आदेश पर एक राष्ट्रव्यापी बहस के बाद इस मुद्दे पर फैसला करने के लिए सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हलफनामा दायर किया। 2016 नवंबर में अदालत के प्रारंभिक आदेश के अनुसार, सिनेमाघरों में उपस्थित सभी को गान चलने पर ‘सम्मान में खड़े होना’ अनिवार्य है।जो ‘एक के भीतर देशभक्ति और राष्ट्रवाद की भावना पैदा करेगा”।यह आदेश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, जो बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश बने के नेतृत्व में दिया गया था।
एक अपील के बाद, अदालत की एक और खंडपीठ-जिसमें चीफ जस्टिस मिश्रा भी शामिल थे।पिछले साल अक्टूबर में संशोधित किया गया था।अदालत ने कहा, ‘लोगों को देशभक्ति के रूप सिनेमा हॉल में खड़े होने की जरूरत नहीं है। बेंच का हिस्सा रहे जस्टिस उपसंचालक चंद्रचूड़ ने पूछा था कि केंद्र सरकार फ्लैग कोड में संशोधन करने से क्या रोक रही है।

पिछले साल दिसंबर में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अंतर-मंत्री समिति का गठन किया था जिसकी अध्यक्षता गृह मंत्रालय से विशेष सचिव रैंक के अधिकारी करेंगे। पैनल भी 10 सदस्यों होंगे जिनकी रैंक संयुक्त सचिव से नीचे नहीं होगी।प्रत्येक एक गृह मंत्रालय, रक्षा, विदेश मंत्रालय, संस्कृति, महिला और बाल विकास, सूचना प्रसारण, अल्पसंख्यक मामलों, कानून, मानव संसाधन विकास और विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग से के सदस्यों होंगे। समिति को छह माह में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।

टीम टी वी न्यूज़

Team TEA VEE News

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