हर साल एडमिशन फी नहीं ले सकेंगे निजी स्कूल:यूपी सरकार ने बिल का ड्राफ्ट पेश किया |

हर साल एडमिशन फी नहीं ले सकेंगे निजी स्कूल:यूपी सरकार ने बिल का ड्राफ्ट पेश किया |

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(लखनऊ),उत्तर प्रदेश सरकार ने आने वाले शैक्षणिक सत्र से निजी स्कूलों की शुल्क संरचनाओं को विनियमित करने के लिए नया कानून लाने का फैसला किया है । माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पहले ही उत्तर प्रदेश के स्व-वित्त रहित स्वतंत्रविद्यालयों (फीस का नियमन) बिल 2017 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किया, अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन और आम लोगों से राय भी मांगी है।सुझाव 22 दिसंबर तक भेजा जा सकता है औरउसे अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा। निजी विद्यालय द्वारा मनमानी फीस वृद्धि पर अंकुश लगाने कि दिशा में यह कदम बढ़ाया है। इसमें यह प्रावधान है की निजी स्कूल अब हर साल एडमिशन फीस नहीं ले पाएंगे। प्रस्तावितविधेयक के तहत छात्र-छात्राओं को स्कूल में अपने पहले प्रवेश पर, कक्षा पंचम से छठी तक पदोन्नति के समय, कक्षा आठवीं से ग्यारहवीं तक पदोन्नति के समय और कक्षा दसवीं से ग्यारहवीं तक पदोन्नति के समय पर ही प्रवेश शुल्कअदा करना होगा ।

20,000 रुपये से अधिक शुल्क लेने वाले निजी स्कूलों को प्रस्तावित कानून के दायरे के तहत लाया जाएगा।यूपी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य बोर्डों से संबद्ध विद्यालयों के अलावा, अल्पसंख्यकसंस्थानों द्वारा संचालित विद्यालयों को भी नए कानून के दायरे में लाया जाएगा।

शुक्रवार को लखनऊ में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि फीस के विनियमन के अलावा, सरकार शुल्क के संग्रह में पारदर्शिता लाने और प्रक्रिया “खुला और जवाबदेह” बनाने की है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को स्कूलों द्वारा लगाए गए शुल्क को विनियमित करने का निर्देश दिया है।शर्मा ने कहा कि हर साल स्कूलों में शुल्कों में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने मौजूदा छात्रों से नए वर्गों में पदोन्नति के लिए प्रवेश शुल्कभी लिया है, और छात्रों को स्कूल परिसर या बाजार में विशिष्ट दुकानों के भीतर आउटलेट से ड्रेस, बैग, किताबें और अन्य सामान खरीदने के लिए मजबूर करते है।अक्सर स्कूल मध्य सत्र के शुल्क में वृद्धि करते हैं और छात्रों को उनकेद्वारा आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के लिए भुगतान करना पड़ता है।एक बार नए कानून लागू हो जाएंगे, विभागीय आयुक्तों की अध्यक्षता वाले एक क्षेत्रीय शुल्क नियामक समिति स्कूलों द्वारा शुल्क लगाएंगे।

हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली में पहले से ही निजी स्कूलों की फीस संरचनाओं की निगरानी के लिए समान कानून लाए जा चुके हैं।अब उत्तर प्रदेश में भी इसकी शुरुवात होने की तैयारी है।

 

टीम टी वी न्यूज़ , लखनऊ

 

Team TEE VEE News, Lucknow

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