पीतलनगरी मुरादाबाद का नाम आखिरकार कैसे पड़ा ? जानिये मुरादाबाद के बारे में

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मुरादाबाद जिसको पीतलनगरी के नाम से जाना जाता है , दिल्ली से 180 किलोमीटर (करीब) की दूरी पर स्तिथ है . मुरादाबाद में पीतल से ले कर कपड़ो के व्यापारी काफी मशहूर हैं . उत्तर प्रदेश के यह जिले की कहानी शाहजहां के समय की है . आइये बात करते हैं विस्तार में :-

1625 से मैं हिन्द में आबाद हूं, मैं मुरादाबाद हूं. शाहजहां की फ़िक़्र ने जिसको दिया शहरी वकार. चार गांव बन गए रूस्तम की काविश से दयार, खुल गए फिर तो तरक्की के हजारों रास्ते, आ गया उजड़ी फिज़ा में रंग-रौनक और निखार, मैं तभी से शहरे रंगी की तरह आबाद हू, मैं मुरादाबाद हूं, हां मैं मुरादाबाद हूं .
मुरादाबाद रामगंगा के दाहिने किनारे पर बसा है,इतिहास की बात करें तो मुरादाबाद का सबसे पुराना नाम चौपला हुआ करता था, चार गांव थे देहरी, भदौरा, दीनदारपुरा, मानपुर नारायणपुर।

1625 ई० में शाहजहां ने रूस्तम खां उर्फ मुकर्रब खां को रूहेलखंड का गर्वनर बनाकर भेजा था, जिन्होंने इस शहर को अपना घर बनाया, शहर का नाम शाहजहां के बेटे मुराद के नाम पर रखा गया.

लेकिन यह नाम रखने का भी दिलचस्प वाक्या है.
जानकारी के मुताबिक उस वक्त शाहजहां का जमाना था। रूस्तम संभल के सूबेदार हुआ करते थे। रूस्तम ने एक नए शहर की नींव रखी और शहर का नाम रखा रूस्तमनगर.
इसकी शिकायत शाहजहां से की गयी। तल्बी हुई.
रूस्तम तोहफे लेकर हाजिर हुए।
शाहजहां ने पूछा- नया शहर बसाया है, क्या नाम रखा है?
रूस्तम ने अर्ज किया- अहरारों और जाटवों का इलाका है, मौका ताकतें रहते हैें, आजकल मुल्क में आपके छोटे साहिब-ए-आलम व हिम्मत-ए-आली मुराद का जिक्र है. इसलिए नए शहर का नाम मुरादाबाद रखा है.
शाहजहां जवाब सुनकर बहुत खुश हुए और रूस्तम को इनामों से नवाज़ा गया.

Team TEAVEE News Channel (INDIA)

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